पेट के कीडे

क्या चाहिए

  1. सेम के पतो का रस – एक बडा चम्मच
  2. शहद  – एक बडा चम्मच

सेवन विधि

सेम के पत्तों को पीस कर उनका रस निकल लें. कम से कम इतने पत्तें अवश्य लें कि एक बड़ा चम्मच रस निकल जाये. अब इसमें सामान मात्रा में शहद मिला लें. दोनों को एक  कटोरी में मिक्स कर लें.

उपरोक्त रस को दिन में तीन बार – प्रातः, मध्यान्ह एवं सायं सेवन करें. इससे चार पांच दिन में पेट के कीडे मरकर बहार निकल आयेंगे.

नोट: इस रस को बनाकर न रखें. जब भी इस्तेमाल करना हो तो ताजे पत्तों का रस निकलकर ही इस्तेमाल करें.

ग्लिसरीन से मुंह के छाले का उपचार

मुंह में ग्लिसरीन लगा कर मुंह को निचे कर के बैठ जायें. मुंह को खुला रखना ज़रूरी है क्योंकि मुंह से जो लार टपकेगी उसी से छाले ठीक होंगे. कम से कम पॉँच मिनट तक ऐसे ही बैठे रहें.

लक्षण

मुंह के अन्दर गाल की त्वचा जगह जगह से फूल जाती है और उसमे पानी जैसे चीज़ भर जाती है. कभी कभी होंठ की अंदरूनी त्वचा पर भी इस तरह के छाले पड़ जाते हैं, कुछ खाने पीने पर इसमे लगता है.

उपचार

ज्यादातर छाले अपने आप ही ठीक हो जाते हैं. पर यदि ज्यादा परेशान कर रहे हो तो ऊपर बताया गया उपचार कर सकते हैं.

अन्य उपचार

दही से मुंह के छालों का उपचार

मुंह के छाले की दवा

मुंह में छाले हो जाने पर छालो के ऊपर थोड़ा सा दही लगा लें. एसा करने पर छालो में तुंरत आराम मिलता हँ. इसके साथ ही केले को दही में मिलाकर दिन में दो बार खाने से आराम मिलता है.

लक्षण

मुंह के अन्दर गाल की त्वचा जगह जगह से फूल जाती है और उसमे पानी जैसे चीज़ भर जाती है. कभी कभी होंठ की अंदरूनी त्वचा पर भी इस तरह के छाले पड़ जाते हैं, कुछ खाने पीने पर इसमे लगता है.

उपचार

ज्यादातर छाले अपने आप ही ठीक हो जाते हैं. पर यदि ज्यादा परेशान कर रहे हो तो ऊपर बताया गया उपचार कर सकते हैं.

अन्य उपचार

ग्लिसरीन से मुंह के छाले का उपचार

गैस व अफारा होने पर पानी में हींग का लेप बना कर नाभि पर लगायें. इससे तुंरत आराम मिलता है. यह नुस्खा बच्चों के लिए भी बहुत उपयोगी है. क्योंकि बच्चों को दवाई लेने या गोली खाने में दिक्कत होती है.

जुखाम और नजले के बाद यदि कफ ज्यादा बन रहा हो तो एक कप चाय में एक चम्मच देसी घी डाल कर दिन में दो तीन बार पियें| ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा लेकिन यदि जुकाम के साथ खासे हो तो ऐसा न कर

अगर आपके पैरों में दर्द हो रहा हो तो पानी को गरम कर के उस में नमक मिला ले| फिर पांच मिनट के लिए पैरो को उसमे डुबाइए| पाच मिनट बाद पैरों को पोछ ले| फिर पैर के पिछले भाग पर बेलन को टाइट हाथो से रगडऐ आप का पैरो का दर्द बिल्कुल ख़तम हो जायेगा|

पुरानी खांसी की अचूक दवा

काली मिर्च दिन भर में पॉँच सात नग धीरे धीरे चूसने से खांसी में पहले ही दिन से तत्काल लाभ मिलता है. एक बार में दो तीन काली मिर्च मुंह में डाल कर चूसें. वर्षो पुरानी खांसी को मेरी दादी ये दवा देकर ठीक कर देती थीं.

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रक्षा बंधन कब मनाएं

 

अक्सर यह सवाल खड़ा हो जाता है की रक्षा बंधन कब मनाया जाना चाहिए. अलग अलग स्थानों पर समय के आलावा तारीख का भी फर्क हो जाता है. इस लेख में मैंने रक्षाबंधन के पर्व का ज्योतिषीय आधार प्रस्तुत किया है.

 

रक्षा बंधन अपराह्नव्यापिनी श्रवण पूर्णिमा में मनाया जाता है| परन्तु भद्रा में यह निषिद्ध है:

“भद्रायाम द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा”|

जब पहले दिन अपराह्न में भद्रा हो, दुसरे दिन पूर्णिमा मुहूर्तत्रय-व्यापिनी हो और वह अपराह्न से पूर्व ही समाप्त हो जाए,  तब दुसरे दिन अपराह्न में रक्षाबंधन करना चाहिए| क्योंकि उस समय पूर्णिमा का अस्तित्व होगा| पुरुषार्थ चिंतामणि कर का वचन है -

 

“यदा द्वितियापराह्नात पूर्वं समाप्ता, तदापि भाद्रयाम द्वे न कर्तव्ये …” इति भद्रायाम निशेधादुत्तरैव| तत्र तिथ्यनुरोधेन  अप्रहनातपुर्वं अनुष्ठाने अप्रहणश्य सर्वथा बधापत्ते:, अपराह्ने ज्योतिष शास्त्र प्रसिद्ध तिथ्यभावेsपि साकल्य – बोधित तिथि सत्त्वात्रैव अनुष्ठानम|”

जब दुसरे दिन पूर्णिमा मुहूर्त-व्यापिनी न हो तब अपराह्न में सकल्यापादित पूर्णिमा भी नहीं होगी| एसी स्थिति में पहिले दिन भद्रा समाप्त होने पर प्रदोष के प्रहर में रक्षाबंधन करना चाहिए. पुरुषार्थ चिंतामणि का ही वाक्य है -

“यदा तुत्तारत्र मुहूर्त द्वय (त्रय) मध्ये किं चित् न्युना पौर्णमाषी तदापराह्ने सर्वथा तदभावत| प्रदोष-पश्चिमो यामौ दिनवत्कर्म चाचरेत इति पराशरात भाद्रन्ते प्रदोष्यामे अनुष्ठानम|”

मतान्तर से धर्मसिन्धुकार आदि कुछ आचार्यों के मतानुसार तिथि के त्रिमिहुर्तव्यपित्व को ही साकल्य प्रोजक माना जाना चाहिए.

पंजाब आदि प्रान्तों में परम्परा के अनुसार रक्षा बंधन के लिए अपराह्न काल को स्वीकार नही किया जाता और मध्याह्न से पूर्व ही (विशेषतया: प्रात: काल में ) ही राखी बंधी जाती है.

लेकिन भद्रा में तो रक्षा बंधन शास्त्रों में सर्वथा वर्जित है.

अन्य सम्बंधित लेख:

  1. रक्षाबंधन की महिमा एवं कथा
  2. Wikipedia Link

हिन्दुओं के चार प्रसिद्ध त्योहारों में से रक्षा बंधन का त्यौहार एक है. यह श्रवण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. यह मुख्यतः भाई बहन के स्नेह का त्यौहार है. इस दिन बहन भाई के हाथ पर राखी बांधती है और माथे पर तिलक लगाती है. भाई प्रतिज्ञा करता है की यथा सम्भव मैं अपनी बहन की रक्षा करूंगा. एक बार भगवान्  कृष्ण  के हाथ से रक्त बहने लगा था तो द्रौपदी ने साड़ी फाड़कर उनके हाथ पर बाँध दी थी. इसी बंधन से श्री कृष्ण ने चीर हरण के समय दु:शासन से द्रौपदी की लाज बचाई थी.

मध्य कालीन इतिहास में एक ऐसी घटना मिलती है जिसमे चित्तोड़ की रानी कर्मवती ने दिल्ली के मुग़ल बादशाह हुमायूं को राखी भेज कर अपना भाई बनाया था. हुमायूँ ने राखी की इज्जत की और उसके सम्मान की रक्षा के लिए गुजरात के राजा से युद्ध किया.

कथा

प्राचीन समय में एक बार देवताओं और दानवों के बिच घोर संग्राम चला. इस संग्राम में राक्षसों की जीत हुई एवं देवता हार गए. दैत्यराज ने तीनो लोकों को अपने वश में कर लिया तथा अपने की भगवान घोषित कर दिया.

दत्यों के अत्याचारों से क्षुब्ध देवताओं के राजा इन्द्र ने देवगुरु ब्रहस्पति से विचार विमर्श किया और रक्षा विधान करने को कहा.

श्रवण मास की पूर्णिमा को प्रातः काल रक्षा विधान संपन्न किया गया.

येन बद्धोबली राजा दानवेन्द्र महाबल:|

तेन तवामभिबध्नामि रक्षे माँ चल माँ चल||

उक्त मंत्रोच्चार से गुरु ब्रहस्पति ने रक्षा विधान किया. अपनी पत्नी इन्द्राणी के साथ इन्द्र ने ब्रहस्पति की वाणी का अक्षरश: पालन किया. इन्द्राणी ने ब्राह्मण पुरोहितों के द्वारा स्वस्तिवाचन कराकर इन्द्र के दायें हाथ में रक्षा सूत्र की बाँध दिया. इसी सूत्र के बल पर इन्द्र ने दानवों पर विजय प्राप्त की.

खांसी की देसी दवाई

अदरक को पीस कर उसमे एक चम्मच शहद मिला कर रात को पीकर सो जाए इससे सभी प्रकार की खांसी ठीक हो जाती है.

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