हिन्दुओं के चार प्रसिद्ध त्योहारों में से रक्षा बंधन का त्यौहार एक है. यह श्रवण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. यह मुख्यतः भाई बहन के स्नेह का त्यौहार है. इस दिन बहन भाई के हाथ पर राखी बांधती है और माथे पर तिलक लगाती है. भाई प्रतिज्ञा करता है की यथा सम्भव मैं अपनी बहन की रक्षा करूंगा. एक बार भगवान्  कृष्ण  के हाथ से रक्त बहने लगा था तो द्रौपदी ने साड़ी फाड़कर उनके हाथ पर बाँध दी थी. इसी बंधन से श्री कृष्ण ने चीर हरण के समय दु:शासन से द्रौपदी की लाज बचाई थी.

मध्य कालीन इतिहास में एक ऐसी घटना मिलती है जिसमे चित्तोड़ की रानी कर्मवती ने दिल्ली के मुग़ल बादशाह हुमायूं को राखी भेज कर अपना भाई बनाया था. हुमायूँ ने राखी की इज्जत की और उसके सम्मान की रक्षा के लिए गुजरात के राजा से युद्ध किया.

कथा

प्राचीन समय में एक बार देवताओं और दानवों के बिच घोर संग्राम चला. इस संग्राम में राक्षसों की जीत हुई एवं देवता हार गए. दैत्यराज ने तीनो लोकों को अपने वश में कर लिया तथा अपने की भगवान घोषित कर दिया.

दत्यों के अत्याचारों से क्षुब्ध देवताओं के राजा इन्द्र ने देवगुरु ब्रहस्पति से विचार विमर्श किया और रक्षा विधान करने को कहा.

श्रवण मास की पूर्णिमा को प्रातः काल रक्षा विधान संपन्न किया गया.

येन बद्धोबली राजा दानवेन्द्र महाबल:|

तेन तवामभिबध्नामि रक्षे माँ चल माँ चल||

उक्त मंत्रोच्चार से गुरु ब्रहस्पति ने रक्षा विधान किया. अपनी पत्नी इन्द्राणी के साथ इन्द्र ने ब्रहस्पति की वाणी का अक्षरश: पालन किया. इन्द्राणी ने ब्राह्मण पुरोहितों के द्वारा स्वस्तिवाचन कराकर इन्द्र के दायें हाथ में रक्षा सूत्र की बाँध दिया. इसी सूत्र के बल पर इन्द्र ने दानवों पर विजय प्राप्त की.