astrology
Archived Posts from this Category
August 16, 2008
रक्षा बंधन कब मनाएं
अक्सर यह सवाल खड़ा हो जाता है की रक्षा बंधन कब मनाया जाना चाहिए. अलग अलग स्थानों पर समय के आलावा तारीख का भी फर्क हो जाता है. इस लेख में मैंने रक्षाबंधन के पर्व का ज्योतिषीय आधार प्रस्तुत किया है.
रक्षा बंधन अपराह्नव्यापिनी श्रवण पूर्णिमा में मनाया जाता है| परन्तु भद्रा में यह निषिद्ध है:
“भद्रायाम द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा”|
जब पहले दिन अपराह्न में भद्रा हो, दुसरे दिन पूर्णिमा मुहूर्तत्रय-व्यापिनी हो और वह अपराह्न से पूर्व ही समाप्त हो जाए, तब दुसरे दिन अपराह्न में रक्षाबंधन करना चाहिए| क्योंकि उस समय पूर्णिमा का अस्तित्व होगा| पुरुषार्थ चिंतामणि कर का वचन है -
“यदा द्वितियापराह्नात पूर्वं समाप्ता, तदापि भाद्रयाम द्वे न कर्तव्ये …” इति भद्रायाम निशेधादुत्तरैव| तत्र तिथ्यनुरोधेन अप्रहनातपुर्वं अनुष्ठाने अप्रहणश्य सर्वथा बधापत्ते:, अपराह्ने ज्योतिष शास्त्र प्रसिद्ध तिथ्यभावेsपि साकल्य – बोधित तिथि सत्त्वात्रैव अनुष्ठानम|”
जब दुसरे दिन पूर्णिमा मुहूर्त-व्यापिनी न हो तब अपराह्न में सकल्यापादित पूर्णिमा भी नहीं होगी| एसी स्थिति में पहिले दिन भद्रा समाप्त होने पर प्रदोष के प्रहर में रक्षाबंधन करना चाहिए. पुरुषार्थ चिंतामणि का ही वाक्य है -
“यदा तुत्तारत्र मुहूर्त द्वय (त्रय) मध्ये किं चित् न्युना पौर्णमाषी तदापराह्ने सर्वथा तदभावत| प्रदोष-पश्चिमो यामौ दिनवत्कर्म चाचरेत इति पराशरात भाद्रन्ते प्रदोष्यामे अनुष्ठानम|”
मतान्तर से धर्मसिन्धुकार आदि कुछ आचार्यों के मतानुसार तिथि के त्रिमिहुर्तव्यपित्व को ही साकल्य प्रोजक माना जाना चाहिए.
पंजाब आदि प्रान्तों में परम्परा के अनुसार रक्षा बंधन के लिए अपराह्न काल को स्वीकार नही किया जाता और मध्याह्न से पूर्व ही (विशेषतया: प्रात: काल में ) ही राखी बंधी जाती है.
लेकिन भद्रा में तो रक्षा बंधन शास्त्रों में सर्वथा वर्जित है.
अन्य सम्बंधित लेख:
- रक्षाबंधन की महिमा एवं कथा
- Wikipedia Link